पात्रता :!
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:सूक्तियां ]] == पात्रता : == जो जत्तियस्स अत्थस्स भायणं सो उ तेत्तियं लहइ। वुट्ठे वि दोणमेहे न डुंगरे पाणियं ढाइ।। —गाहारयणकोष : २ जो जितने अर्थ का पात्र होता है उसको उतना ही मिलता है (उससे अधिक नहीं), जैसे द्रोण मेघ के बरसने पर भी पहाड़ पर पानी नहीं ठहरता।