पंडित :!
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:सूक्तियां ]] == पंडित : == समीक्ष्य पण्डितस्तस्मात् , पाशजातिपथान् बहून्। आत्मना सत्यमेषयेत् , मैत्री भूतेषु कल्पयेत्।। —समणसुत्त : ५८९ इसलिए पंडित पुरुष अनेकविध पाश या बंधनरूपी स्त्री, पुत्रादि के सम्बन्धों की, जो कि जन्म—मरण के कारण हैं, समीक्षा करके स्वयं सत्य की खोज करे और सब प्राणियों के प्रति मैत्रीभाव…