पेशी!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पेशी – Pashi. Muscles. औदारिक शरीर में पाई जाने वाली माँसपेशियाँ “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पेशी – Pashi. Muscles. औदारिक शरीर में पाई जाने वाली माँसपेशियाँ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वस्तुसमास – Vastusamaasa.: Name of the 18th part of scriptural knowledge (Shrutgyan). श्रुतज्ञान के 20 भेदों में 18 वां भेद “
उभयबंध Bilateral bondage (of body with soul and karmas). जीव और कर्म का परस्पर में एक दूसरे की अपेक्षा से होने वाला बंध।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशालप्रभ – Vishalaprabha. Name of the 10th Jaina – Lord of Videh Kshetra (region). विदेह क्षेत्र के १० वें तीर्थकर का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वसु – Vasu.: A type of heavenly deities (Laukantik),Name of a king who went to hell because of telling lie.Eight in number. लौकंतिक देवों का एक भेद , एक राजा का नाम जो झूठ बोलने के कारण नरक में गया ,आठ की संख्या”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मैथुन संज्ञा– Maithun Sangya. Sex instinct. 4 संज्ञाओ में एक संज्ञा; मैथुनरूप क्रियाओ में होने वाली इच्छा”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वल्कल – Valkala.: Bark, skin of trees, A kind of believers in ignorantism. वृक्षों की छाल ,अज्ञानवादी के 67 भेदों में एक भेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्द्धमानचरित्र – Varddhamaana Charitra.: Name of a treatise related to the biography of Lord Mahaveera. तीर्थंकर महावीर के जीवन चरित से सम्बंधित एक संस्कृत ग्रन्थ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचगुरु भक्ति – Panchaguru Bhakti. A type of devotional prayer. 10 भक्तियों में पूज्यपाद कृत एक भक्ति “
[[श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष]] == कायक्लेश : == सुखेन भावितं ज्ञाने, दु:खे जाते विनश्यति। तस्मात् यथाबलं योगी, आत्मानं दु:खै: भावयेत्।। —समणसुत्त : ४५३ सुखपूर्वक प्राप्त किया हुआ ज्ञान दु:ख के आने पर नष्ट हो जाता है। अत: योगी को अपनी शक्ति के अनुसार दु:खों के द्वारा अर्थात् कायक्लेशपूर्वक आत्म-चिन्तन करना चाहिए।