न्यायविनिश्चयविवरण!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] न्यायविनिश्चयविवरण – Nyaayvinischyavivrna. Name of a book. एक न्यायविविषयक ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] न्यायविनिश्चयविवरण – Nyaayvinischyavivrna. Name of a book. एक न्यायविविषयक ग्रंथ “
ध्रुवशून्य वर्गणा A type of aggregate of Karmic molecules. 23 पुद्गल वर्गणाओं में एक वर्गणा; इसका गुणकार मिथ्यादृष्टि जीवराशि में असंख्यात लो का भाग देने से जो लब्ध आवे उतना है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुषमादुषमा काल – Sushamaa-Dushamaa Kaala. Pleasant & sorrowful long period of woridily cycle ( the 3nd of Avasarpini Kal & the 4th of Utsarpini Kal According to Jaina Philosoph) अवसर्पिणी के तृतीय काल और उत्सर्पिणी के चतुर्थ काल का नाम । इसका काल 2 कोड़ाकोड़ी सागर प्रमाण है। इस समय जघन्य भोगभूमि रहती है,…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवविचय – Bhavavicaya. Right meditation on materialistic world or cycle of birth. सातवाँ धर्मध्यान; भव – संसार सदैव दुःख रूप ही है’ ऐसा चिंतन करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्गधारा – Vargadhaaraa.: A type of mathematical series. श्रेणी व्यवहार गणित की सर्वधारा आदि 14 धाराओं में एक ; 1, 4, 9,16 (12, 22,32,42)………….
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवन – Bhavana. Residential places (of human being, deities etc.) भवनवासी देवों के रहने के स्थान एवं मनुष्यों के आवास भवन कहलाते हैं “
धृतिमित्र A king of Kuru dynasty. कुरूवंशी राजा; यह गंगदेव के पश्चात् हुआ था।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वरतनु (द्वीप ) – Varatanu (Dviipa): Name of an island of Lavan & Kalod oceans. लवण तथा कालोदसागर का अन्तर्दिप “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] न्यायकेवली – Nyaayakevali. Name of a book written by Acharya Shridhar-2. आचार्य श्रीधर-२ (ई. सन् 991) द्वारा रचित एक नैयायिक ग्रंथ “
धृत धर्मा A king of Kuru dynasty. राजा धृतव्यास के पश्चात् हुआ एक कुरुवंशी राजा । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]