सर्वश्यामा!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वश्यामा – Sarvasyaamaa. Mother’s Name of Lord Anantnath. तीर्थकर अनंतनाथ की माता, अपरनाम जयश्यामा ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वश्यामा – Sarvasyaamaa. Mother’s Name of Lord Anantnath. तीर्थकर अनंतनाथ की माता, अपरनाम जयश्यामा ।
देवकृत अतिशय Fourteen excellences (extraordinary occurrences) of Lord Arihant (done by deities). तीर्थंकरों के 34 अतिशयों में से 14 अतिशय जो देवों द्वारा किये जाते हैं, जैसे- संख्यात योजनों तक वन असमय में ही पत्र, फूल और फलों की वृद्धि से संयुक्त हो जाते हैं, कंटक और रेती आदि को दूर करती हुई सुखदायक वायु…
छद्मस्थ वीतराग Detached, non-omniscient saint at the 11th-12th stage of spiritual development. ग्यारहवें-बारहवें गुणस्थान वाले मुनि छद्मस्थ वीतराग कहलाते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वपरित्याग – Sarvaparitayaaga. Renunciation of all (on the pathe of salvation). उपसर्ग मार्ग; शुद्धात्मा के सिवाय अन्य जो कुछ भी बाह्यअभ्यन्तर परिग्रह रूप है, उस सर्व का त्याग ही उत्सर्ग है। निष्चय नय, सर्वपरित्याग, परमोपेक्षा संयम, वीतरागचारित्र, शुद्धोपयोग ये सब एकार्थवाची है।
देवता Lord, Deities, Celestial beings. अर्हंत ; सिद्ध आदि भगवान अथवा स्वर्ग में रहने वाले देव। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चैत्यालय A type of temple without having Kalash at the top of dome. ऐसा मंदिर जिसके शिखर पर कलश न हो ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वज्ञसिद्वि – Sarvagyasiddhi. Name of a book written by a saint Anantkirti. अनंतकीर्ति द्वारा रचित वृहत् तथा लधु सर्वज्ञसिद्वि ग्रंथ। समय ई.श. 8 ।
दिशांजय क्रिया A type of auspicious activity (winning the universe). गृहस्थ की गर्भान्वय आदि 53 क्रियाओं में एक क्रिया- षट् खण्ड सहित समुद्रान्त पृथिवी को जीतकर वहाँ अपनी सत्ता स्थापित करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चिलात A country of middle Mlechchhakhand (region) in the north Bharat Kshetra (region). उत्तर भरतक्षेत्र के मध्यम्लेच्छखण्ड का एक देश ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]