भावयोग!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावयोग – Bhavayoga. Subjective (psychical) vibration. मन वचन काय से संयुक्त संसारी जीव के अंगोपांग व शरीर नाम कर्म के उदय से जीव की वह शक्ति जो कर्म व नोकर्म को ग्रहण करती है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावयोग – Bhavayoga. Subjective (psychical) vibration. मन वचन काय से संयुक्त संसारी जीव के अंगोपांग व शरीर नाम कर्म के उदय से जीव की वह शक्ति जो कर्म व नोकर्म को ग्रहण करती है “
उद्यवन Devotion of soul towards true knowledge. आत्मा की सम्यग्दर्शनादि परिणति होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभाव – Vibhava. Passionate feelings ( i.e feelings contrary to real nature ) due to the fruition of Karmas. कर्मों के उदय से होने वाले जीव के रागादि भावों को विभाव कहते हैं “
गंधोदक Sacred fragrant water (pertaining to anointment of a Jaina idol). सुगन्धित प्रासुक जल; भगवान के न्हवन (अभिषेक) से पवित्र जल ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विषयातीत – Vishayatita. Supreme bliss. विषयों की निवृति से उत्पन्न होने वाला सुख अर्थात् संसार के विषयों से अतीत स्वाधीन अव्याबाध सुख “
गन्धर्वनगर A city of Vidyadhars, An illusory image of a city of clouds. विद्याधारों की एक नगरी , मेघों से निर्मित काल्पनिक नगर । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विन्दफल – Vindaphala.: Volume,space occupied. आयतन ,घनफल ,विस्तार “
एक सौ उन्हत्तर A number – 169 (169 super human beings). 169-169 दिव्य पुरूष (महापुरूष ) कहे जाते हैं(तिलोयपण्णत्ति के अनुसार)।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वारिषेण – Vaarishena.: The son of king Shrenik who ultimately became deity in the heaven, Name of an Anuttaropapadak in the era of Lord Mahavira. राजा श्रेणिक का पुत्र ,मुनि हो स्वर्ग में देव हुआ ,भगवान महावीर के तीर्थ के एक अनुत्तरोपपादक “