न्यायकेवली!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] न्यायकेवली – Nyaayakevali. Name of a book written by Acharya Shridhar-2. आचार्य श्रीधर-२ (ई. सन् 991) द्वारा रचित एक नैयायिक ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] न्यायकेवली – Nyaayakevali. Name of a book written by Acharya Shridhar-2. आचार्य श्रीधर-२ (ई. सन् 991) द्वारा रचित एक नैयायिक ग्रंथ “
उज्जवलित Made bright, Radiant, The 7th layer (Patal) of the 3rd hell. प्रकाशवान दीप्तिमान् तीसरे नरक का सातवाँ पटल।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वध्यघातक – Vadhyaghaataka: Contradictory relation pertaining to destruction. विरोध के तीन भेदों में प्रथम भेद; वध्यघातक भाव विरोध जो सर्प-नेवले, अग्रि-जल आदि में होता है ” संबंध के अनेक भेदों में एक भेद “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भद्रमुख – Bhadramukha. Name of a jewel (a great architecture) of Chakravarti ‘Bharatesh’. भरतेश का ‘स्थपति’ रत्न, यह वास्तुकला का ज्ञाता था “
उञ्छवृत्ति Livlihood by collecting the remaining food-grains from the field after harvesting. फसल कटने के बाद खेत से धान्य को बीनकर लाना एंव पकाकर खाना उञ्छवृत्ति कहलाती है। जीवंधर स्वामी की माँ रानी विजया ने 16 वर्ष तक तापसियों के आश्रम में रखकर उ॰छवृत्ति से जीवन यापन किया था ऐसी कथा का जीवंधर चंपू में…
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == दु:खमुक्ति : == तस्यैष मार्गो गुरुवृद्धसेवा, विवर्जना बालजनस्य दूरात्। स्वाध्यायैकान्तनिवेशना च, सूत्रार्थसंचिन्तनता धृतिश्च।। —समणसुत्त : २९० गुरु तथा वृद्धजनों की सेवा करना, अज्ञानी लोगों के सम्पर्क से दूर रहना, स्वाध्याय करना, एकान्तवास करना, सूत्र और अर्थ का सम्यक् चिन्तन करना तथा धैर्य रखना—(ये दु:खों से मुक्ति के) उपाय…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नोकर्म वर्गणा – Nokarma Varganaa. 19 Varganas out of 23 excluding Karmamn, Bhasha, Mano & Tejas. कुल 23 वर्गणाओं में से कार्मण, भाषा, मनो, तैजस इन 4 को छोड़कर 19 वर्गणाएं “
उज्जह दोष A fault of Samadhimarana (holy death). समाधिमरण कराने वाला निर्यापक साधु यदि अकेला हो और वह आहारादि को जावे जो समादिमरण करने वाले क्षपक साधु का मन विचलित हो जावे तो धर्म का अपयश हो ऐसा दोष उज्जह दोष है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वत्सा –Vatsaa: Name of a country of Videh Kshetra (region). जम्बू द्वीप के विदेह क्षेत्र में सीता नदी और निषध पर्वत के मध्य स्थित 8 देशों में प्रथम देश “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नोआगम द्रव्य भाव – Noaagama Dravya bhaaava. A type of Bhav Nikshep. भाव निक्षेप का एक भेद “