पुराणसार!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुराणसार – Puranasara. A book written by Acharya Shrichandra. आचार्य श्रीचन्द्र (ई. १४९८-१५१८) द्वारा रचित ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुराणसार – Puranasara. A book written by Acharya Shrichandra. आचार्य श्रीचन्द्र (ई. १४९८-१५१८) द्वारा रचित ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रचाला प्रचाला – Prachalaa Prachalaa. Deep drowsiness (Karmic nature causing deep drowsiness). दर्शनावरण कर्म का एक भेद; जिसके उदय से सोते हुए मुख से लार बहती है और अंगोपांग भी चलते है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगपरिकर्म – मन वचन काय द्वारा आत्म प्रदेषो की चंचलता। Yoga parikarma-Vibration in soul points
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वृष्यरससेवा –VrsyarasaSevaa. Taking nutritious spicy food causing excitement. अब्रम्ह के १० भेदों में एक भेद ; पौष्टिक आहार का ग्रहण करना, जिससे बल ओ वीर्य की वृद्धि हो
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नोच्चय – सुमेरू पर्वत का अप रनाम Ratnoccaya-The other name of Sumeru Mountain
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनोवर्गणा – Manovargana. See – Manodravyavarganaa. देखें – मनोद्रव्यवर्गणा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगनिग्रह – मन वचन काय की स्वछन्द प्रवृत्ति को सम्यक् प्रकार से रोकना। Yoganigraha-Controlling the activities related to mind speech & body
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रथपूर – विजयार्घ की दक्षिण श्रेणी के नगरों के नाम। Rathapura-Name of cities situated in southern Vijayvardha Mountain
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मार्दव : == कुलरूवजादिबुद्धिसु, तवसुदसीलेसु गारवं किंचि। जो णवि कुव्वदि समणो, मद्दवधम्मं हवे तस्स।। —समणसुत्त : ८८ कुल, रूप, जाति, बुद्धि, तप, श्रुत और शील का जो श्रमण थोड़ा—सा भी गर्व नहीं करता, वह मार्दव धर्म से संपन्न हुआ करता है।