पक्वाशय!
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पक्वाशय: An inner organ of body, abdomen or belly औदारिक शरीर का एक अंग, आमाष और पक्वाषय में 16 आंते रहती है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पक्वाशय: An inner organ of body, abdomen or belly औदारिक शरीर का एक अंग, आमाष और पक्वाषय में 16 आंते रहती है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूक दोष–Muuk Dosh. A fault committed while paying reverence to Lord. वंदना के 32 दोषों में एक दोष; मन–मन में पढना ताकि दूसरा न सुने अतवा अथवा वंदना करते करते बीच–बीच में इशारे करना”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रेयोविधा – Shreyovidhaa. Name of a treatise written by Acharya Abhayanandi Ji of Nandi group. नंदिसंघ देशीयगण के आचार्य अभयनंदि द्वारा रचित अनेक कृतियों में एक कृति, समय – ई. 930-950 “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रारब्ध योगी- शुद्धात्मा भावना के प्रारम्भक और सूक्ष्म सविकल्प अवस्था में सिथत पुरुश। Prarabdha yogi- One engrossed in meditation inabsolutely
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रशमभाव-पंचेन्द्रियों के विषयों में शिथिल मन का होना ही प्रशम भाव कहलाता है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकीर्णक देव – Prakirnaka Deva. A type of deites (as common citizens). देवों के दश भेदों में से एक; जो देव प्रजा के समान होते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतसागर – Shrutasaagara. Name of a saint in the group of Akampanacharya, Name of a Bhattarak of Nandi group, also name of the disciple of Acharya Shri Kunthusagar Maharaj. अकम्पनाचार्य के संघस्थ एक मुनि; इन्होने राजा श्रीधर्मा के मंत्रियो से शास्त्रार्थ कर उन्हें पराजित किया था ” नंदीसंघ बलात्कार गण में भट्टारक विद्यानंदि-2 के…
त्रिगुणसार व्रत A country of Bharat kshetra in middle Arya Khand (region). क्रमशः 1,1,2,3,4,5,4,4,3,2,1 इस प्रकार 30 उपवास करना व णमोकार मंत्र का त्रिकाल जाप्य करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विदुर – Vidura. The younger brother of Dhritrashtra- Pandu of kaurav dynasty. कौरववंशी धृतराष्ट्र – पाण्ङू का छोटा भाई ” पाण्ङवों के परम हितैषी, अंत में मुनि विश्वकीर्ति से मुनि दिक्षा ली ” लाक्षा ग्रह में विदुर द्वारा बनवाई गई सुरंग से ही निकलकर पाण्ङवों की प्राण रक्षा हुई “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीषेण – Shreesena. The past-birth (11th) soul of Lord Shaantinaath, Name of the 5th predestined Chakravarti (emperor). शांतिनाथ भगवान के पूर्व भव का 11वां भव, यह मगध देश का राजा था ” आगामी 5वें चक्रवर्ती का नाम “