वास्तु में पुराने सामानों का प्रभाव आध्यात्मिक, योग, असि—मसि—कृषि, कला, ज्योतिष, वास्तु आदि ६४ विद्याओं के जनक आदिब्रह्मा (भ.ऋषभदेव) हैं। गृहशिल्प और देवशिल्प का ज्ञान आदिब्रह्मा ने अनन्तवीर्य एवं विश्वकर्मा जी को दिया । सम्पूर्ण विश्व ने भारत को आध्यात्मिक गुरु माना है। आज दूरदर्शन कार्यव्रमों में करीब सभी चैनलों पर वास्तुशास्त्र की चर्चा हो…
यह सृष्टि अनादि है अनंत है शाश्वत है
भवनवासी दिक्कुमार एवं अग्निकुमार देव (गणिनी आर्यिकारत्न श्री ज्ञानमती माताजी से क्षुल्लक मोतीसागर जी की एक वार्ता) क्षुल्लक मोतीसागर – वंदामि माताजी! श्री ज्ञानमती माताजी – बोधिलाभोऽस्तु! क्षुल्लक मोतीसागर – माताजी! आज आपसे मैं दिक्कुमार एवं अग्निकुमार देवों के विषय में जानकारी चाहता हूँ कृपया बतलाने का कष्ट करें। श्री ज्ञानमती माताजी – वैसे तो…
मर्यादा की रक्षा हमारा कर्तव्य है -आचार्यकल्प १०८ श्री श्रुतसागर जी महाराज ( समाधिस्थ ) वर्ण और जातियों की प्राचीनता के संबंध में न जाने क्यों जब-तब शंकाएँ उठायी जाती रही हैं ? बिना सोचे-समझे इस व्यवस्था को कोसा जाता रहा है और आज भी आलोचना की जा रही है, किन्तु यदि पूर्वाग्रह रहित…
काली मिर्च मौसम बदलने के साथ ही मनुष्य के शरीर में भी परिवर्तन देखने को मिलते हैं। इनमें से सबसे प्रमुख बीमारी जुकाम है। जिसके लक्षण सामान्यत: अधिकतर लोगों में दिखाई पड़ते हैं । अगर घरेलू उपचार के तरीके अपनाए जाएं तो जुकाम से बचा जा सकता है। १. सूखी खाँसी में काली मिर्च तथा…
चिर स्थाई सम्पदा — चरित्र निष्ठा चरित्र मनुष्य की सर्वोपरि सम्पदा है। विश्व में अवतरित होने वाले महापुरुषों की महानता का आधार उनका श्रेष्ठ चारित्र है। मनुष्य इस अक्षुण्ण सम्पदा के आधार पर युगपुरुष , देवदूत अथवा अवतार स्तर पर उँचा उठने में समर्थ होता है, ऐसे ही चरित्र निष्ठ व्यक्तियों ने विश्व वसुन्धरा को…
जैन सिद्धांत प्रवेशिका के अमर रचनाकार पंडित गुरू गोपालदास जी बरैया हिन्दी के शुरूआती माह चैत्र में हम याद कर रहे हैं पंडित गुरू गोपालदास जी बरैय्या को जो इसी माह में आगरा के श्री लक्ष्मणदास जी बरैय्या के घर पैदा हुए थे। पं. टोडरमलजी को ‘आचार्य कल्प’ तथा पं. बनारसीदास जी को ‘कविवर’ के…
क्या आप बाराती हैं ? अगर आप बाराती बनकर जा रहे हैं तो ध्यान रखें कुछ बाते जिन पर अमल कर आप पा सकते हैं एक अच्छी बारात का खिताब । (१) सबसे पहले आप उस भावना को मन से निकालिए कि आप लड़के वाले हैं। इसलिए सर्वेसर्वा हैं। (२) आप बारात में उतने ही…
निर्जरा के स्थान काललब्धि आदि की सहायता से परिणामों की विशुद्धि से वृद्धि को प्राप्त हुआ कोई भव्य, पंचेन्द्रिय, संज्ञी, पर्याप्तक जीव क्रम से अध:करण५ आदि सोपान पंक्ति पर चढ़ता हुआ बहुतर कर्मों की निर्जरा करने वाला होता है। १. सर्वप्रथम वही जीव प्रथम सम्यक्त्व की प्राप्ति के निमित्त मिलने पर सम्यग्दृष्टि होता हुआ…