मुखड़ा क्या देखे दरपन में ?
मुखड़ा क्या देखे दरपन में ? (काव्य उनतीस से सम्बन्धित कथा) ‘‘यह नंग जंगली, असभ्य यहाँ कहाँ से आ टपका? थोड़ी भी लज्जा नहीं इसे! बेशरमी की पराकाष्ठा को भी लाँघकर आगे बढ़ा चला आ रहा है! लोक व्यवहार से कोसों दूर रहने वाले इस मलिन वेषधारी दीन दरिद्री को एक फटी हुई कोपीन भी…