तिरस्कार से सत्कार!
तिरस्कार से सत्कार सुधा-बहन शशिप्रभा! जब श्री रामचन्द्र सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास में घूम रहे थे, क्या देवतागण भी उनकी सेवा करते थे? शशिप्रभा-हाँ बहन, इसका मैं एक उदाहरण तुम्हारे सामने प्रस्तुत करती हूँ। सुनो! किसी समय निर्जन वन में चलते हुए जब सीता अत्यन्त थक गईं तब श्रीराम से बोलीं-हे नाथ! मेरा…