जैनसाहित्य के संदभ्र में ऐतिहासिक तथ्य!
पं. भगवतीदास विरचित ‘मइंकलेहा-चरिउ में मूढ़त्रय विवेचन प्राचीन भारतीय वाङ्गमय को समृद्धता के शिखर पर पहुँचाने का महत्त्वपूर्ण कार्य संस्कृत प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं के माध्यम से प्राप्त हुआ है। संस्कृत को आज भी देश में व्यापक स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं प्राकृत और अपभ्रंश का साहित्य कभी इस देश के बहुसंख्यक लोगों द्वारा समादृत…