अर्हंत :!
[[श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] == अर्हंत : == घनघातिकर्ममथना:, त्रिभुवनवरभव्यकमलमार्तण्डा:। अर्हा: (अर्हन्त:) अनन्तज्ञानेन, अनुपमसौख्या जयन्तु जगति।। —समणसुत्त : ७ सघन घाति कर्मों का आलोड़न करने वाले, तीनों लोकों में विद्यमान भव्य जीव रूपी कमलों को विकसित करने वाले सूर्य, अनन्तज्ञानी और अनुपम सुखमय अर्हंतों की जगत में जय हो।