उद्गम!
उद्गम- दाता में होने वाले जिन अभिप्रायों से आहार आदि उत्पन्न होता है वह उद्गम दोष है।
उद्गम- दाता में होने वाले जिन अभिप्रायों से आहार आदि उत्पन्न होता है वह उद्गम दोष है।
किसी को दोस्त या सहेली बनाने से पहले सौ बार सोचना, वरना इस भूल के लिए तुम्हें ताउम्र अपने आपको पड़ेगा कोसना। जीवन कई प्रकार के रंगों से भरा होता है। या यूँ कहें कि जीवन में कई प्रकार के रंग होते हैं । ये रंग व्यक्ति के स्वभाव, व्यवहार, आदत, चाल, चलन इत्यादि कई…
गौरवता का गौरव-गोपाचल ऊषा की बेला धीरे—धीरे हट रही है, रवि किरणें फैलना प्रारम्भ हो गई हैं, शीतल मन्द पवन चल रही है। चारों ओर सौरभ सुगन्ध बिखेर रहा है। सीढ़ियों पर पद चाप सुनाई दे रही है। पदचाप ध्वनि आभास दे रही है मन की गति की! कोई प्रमुदित मन उल्लसित होकर उड़ना चाह…
वीर सेवा मंदिर महावीर जयन्ती के अवसर पर अनुमोदित प्रस्ताव पर पं. जुगलकिशोर मुख्तार ने २१ अप्रैल सन् १९२९ को समंतदभद्राश्रम की स्थापना की। इस आश्रम से अनेकान्त मासिक शोध पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ किया। लगभग एक वर्ष बाद इस संस्था का नाम बदल कर वीर सेवा मंदिर कर दिया गया । वहाँ से शोध…
जैन धर्म में दान वैशिष्ट्य: शास्त्रीय परिप्रेक्ष्य जैन धर्म में दान के प्रति एक विशिष्ट दृष्टिकोण रखा गया है। जैनधर्म में आत्मा के अविनाशी गुणों में दान को भी सम्मिलित किया गया है। दानांतराय कर्म के क्षय से आत्मा में क्षायिकदान नामक गुण प्रगट होता है। एक अपेक्षा से दान क्षायिक गुण होने के कारण…
पं. आशाधर : व्यक्तित्व एवं कृतित्व सारांश १२वीं श. ईसवी के बहुश्रुत एवं प्रतिभाशाली जैन विद्वान पं. आशाधर जी ने वांगमय की श्री वृद्धि में अतुलनीय योगदान दिया है। प्रस्तुत लेख में लेखक ने उनके जीवन के विविध पहलुओं की विेवेचना के साथ ही उनकी प्रकाशित एवं अप्रकाशित कृतियों का संक्षिप्त परिचय दिया है। महाकवि…
जंबूदीव-पण्णत्ति-संग्रहो के कर्ता पद्मनंदी कौन ? जंबूद्वीप-पण्णत्ति– संग्रहो यह करणानुयोग का ग्रंथ माना जाता है तथा इसकी रचना ई. सन. की ग्यारहवीं सदी की मानी जाती है । इस संबंध में ‘जैन साहित्य और इतिहास’ में पं. नाथूराम प्रेमी ने तथा ‘जंबूद्वीव-पण्णत्ति-संगहो’२ ग्रंथ की प्रस्तावना में डॉ. ए. एन. उपाध्ये ने यह ग्रंथ दसवीं-ग्यारहवीं…
ब्रह्मचर्याष्टक प्रश्न ५२८—संसार की वृद्धि किससे होती है ?उत्तर—मैथुन सेवन से संसार की वृद्धि होती है। प्रश्न ५२९—मैथुन से संसार की वृद्धि किस प्रकार सम्भव है ?उत्तर—मैथुन करने से अनेक प्रकार के कीड़ों का विघात होता है, उस विघात से हिंसा होती है, हिंसा से कर्मों का बन्ध होता है और कर्मों के बंधन से…