कागदीपुरा (नालछा) में ही पंडित आशाधरजी द्वारा निर्मित विद्यापी सारांश २३ अक्टूबर २००३ को नालछा के समीप कागदीपुरा से भगवान नेमिनाथ की १३ वीं शती की एक पद् —मासन सांगोंपांग प्रतिमा प्राप्त हुई। इस प्रतिमा की प्राप्ति स्थल के ऐतिहासिक सन्दर्भों एवं पुरातात्विक अवशेषों का विश्लेषण प्रस्तुत आलेख में किया गया है। नाालछा धार…
पं. जुगलकिशोर मुख्तार जीवन परिचय जन्म २० दिसम्बर १८७७ स्वर्गवास २२ दिसम्बर १९६२ प्राच्य विद्या महार्णव पं. जुगलकिशोर मुख्तार ‘युगवीर’ भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के गम्भीर अध्येता और मौलिक चिन्तक थे आपका अधिकांश समय जैन साहित्य, कला एवं पुरातत्व के अध्ययन, अनुसंधान में ही व्यतीत हुआ। आपने महानगरी दरियागंज, दिल्ली में वीर सेवा मंदिर की…
अत्तिमब्बे डॉ. हंपा नागराजय्य कर्नाटक के इतिहास में दसवीं शताब्दी, सुवर्णयुग कहलाती है। राजकीय, साहित्य, संस्कृति, कला, धर्म इस प्रकार अनेक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण घटनाएं इसी समय में घटी हैं। गंग, राष्ट्रकूट, पश्चिम चालुक्यों के दो चक्रवर्ती इसी शताब्दी में विराजमान थे। इम्मड़ि बूतुग, मारसिंह, चावुंडराय ने गंगवंश को प्रज्वलित किया। मुम्मड़ि कृष्ण ने…
संज्ञी मार्गणासार जीव दो प्रकार के होते हैं—संज्ञी और असंज्ञी। संज्ञी—नोइन्द्रियावरण कर्म के क्षयोपशम या उससे उत्पन्न ज्ञान को संज्ञा कहते हैं। वह जिसके हो वह संज्ञी कहलाता है अर्थात् मन सहित जीव संज्ञी हैंं। ये शिक्षा, उपदेश, संकेत ग्रहण कर सकते हैं। असंज्ञी—मन रहित जीव असंज्ञी कहलाते हैं। ये शिक्षा, उपदेश आदि नहीं समझ…
अक्षय निधि व्रत अक्षयनिधिनियमस्तु श्रावणशुक्ला दशमी भाद्रपदशुक्ला तत्कृष्णा चेति दशमीत्रयं पञ्चवर्षे यावत् व्रतं कार्यम्; दशमीहानौ तु नवम्यां वृद्धौ तु यस्मिन् दिने पूर्णा दशमी तस्मिन्नेव दिने व्रतं कार्यम्; वृद्धिगततिथौ सोदयप्रमाणेऽपि व्रतं न कार्यम्। अर्थ- अक्षय निधि व्रत श्रावण शुक्ला दशमी, भाद्रपद कृष्णा दशमी, भाद्रपद शुक्ला दशमी, इस प्रकार तीन दशमियों को किया जाता है। यह व्रत…
कुण्डलपुर के राजकुमार महावीर (नाटिका) प्रस्तुति-आर्यिका चन्दनामती कुण्डलपुर नगर का दृश्य है। खूब सजी हुई नगरी दिखाएँ। सब तरफ पुष्प, रत्न आदि बिखरे हुए हैं। नगरवासी सब बड़ी प्रसन्नमुद्रा में दिखाई दे रहे हैं। जगह-जगह पर लोग बैठे हंस-हंसकर बातें कर रहे हैं। तभी उस नगर में किसी दूसरी नगरी से एक व्यक्ति आता है…
कर्मबंध के कारण कर्मबंध के पाँच कारण माने गये हैं– ‘मिथ्यादर्शनाविरतिप्रमादकषाययोगा बन्धहेतव:’।।१।। मिथ्यात्व, अविरति, प्रमाद, कषाय और योग। १. मिथ्यात्व के गृहीत और अगृहीत, ऐसे दो भेद होते हैं। गृहीत-पर के उपदेश आदि निमित्त से विपरीत बुद्धि का होना। कुदेव, कुशास्त्र, कुगुरु आदि का श्रद्धान करना। अगृहीत-बिना उपदेश, अनादिकालीन संस्कारवश परवस्तु को अपनी समझना, किसी…
भावदेवब्राह्मणस्य दीक्षा ग्रहणं भावदेवब्राह्मणस्य दीक्षा ग्रहणं संस्कृत भाषा में अस्ति जंबूद्वीपे भरतक्षेत्रे आर्यखण्डस्य मगधदेशे वर्धमाननाम नगरम्। तत्र यज्ञकुशलेषु ब्राह्मणेषु कश्चित् आर्यावसु: नाम ब्राह्मणोऽस्ति। तस्य साध्वी भार्या सोमशर्मा पतिधर्मपरायणासीत् तयोर्भावदेव-भवदेव नामानौ द्वौ पुत्रौ स्त:। तौ विद्याभ्यासात् वेदशास्त्रव्याकरणतर्ववैद्यक-छंदोनिमित्तसंगीतकाव्यालंकारेषु विषयेषु प्रावीण्यं अगच्छताम्, वादविवादेषु कुशलौ उभौ वयस्कौ जातौ। पूर्वोपार्जितपापकर्मोदयेन अनयो: पिता आर्यावसुब्राह्मणो महकुष्टरोगेण पीडितो जात:, असौ गलितकुष्टवेदनां सोढुमक्षम: सततं…
भारत की शान बच्चे दुनिया में छोटे—छोटे कई बच्चे अपने हुनर, प्रतिभा और मेहनत के बल पर ऐसे काम कर जाते हैं, जो दूसरों के लिए मिसाल बन जाती है। बाल दिवस के इस मौके पर हम तुम्हें ऐसे भारतीय बच्चों के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया में हमारे देश का नाम…